बच्चों को सबसे पहले नैतिकता व राष्ट्र प्रेम की शिक्षा दी जाए – क्षीरसागर

मुंबई। सुप्रसिद्ध समाजसेवी व शेकाप के ठाणे जिला सचिव श्री नारायण क्षीरसागर ने कहा है कि देश की मजबूती के लिए बच्चों को सबसे पहले नैतिकता व राष्ट्र प्रेम की शिक्षा दी जानी चाहिए ।

श्री क्षीरसागर आज दादर में ‘बाल संस्कार’ शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में श्री क्षीरसागर ने ‘बाल संस्कार’ पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अगर किसी देश की जनता अपने राष्ट्र से प्रेम करती है तो उस राष्ट्र को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। ऐसे राष्ट्र को कोई पराजित भी नहीं कर सकता।

इसलिए देश के प्रत्येक नागरिक में राष्ट्रवाद की भावना पैदा करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा जब बच्चा माँ के गर्भ में आता है तभी से यह अभियान शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे ही सरकार को किसी महिला के गर्भवती होने के बारे में जानकारी मिले, उसी समय से यह अभियान शुरू कर देना चाहिए।

सरकार की तरफ से दवाओं, पौष्टिक आहार के साथ-साथ उस महिला को एक राष्ट्र ध्वज भी दिया जाना चाहिए जिसे वह प्रतिदिन देख सके।
इस महिला को देशभक्ति से संबंधित फिल्मों की सीडी, क्रांतिकारियों की जीवनगाथा तथा महापुरुषों की जीवनी भी पढ़ने के लिए दी जानी चाहिए; ताकि वह महिला प्रतिदिन राष्ट्रवादी माहौल में रहे। यदि ऐसा हुआ तो उसके गर्भ में पल रहे शिशु के भीतर अपने आप राष्ट्रीय भावना पैदा हो जायेगी।

उन्होंने कहा कि बालक के पैदा होने पर उसे सबसे पहले राष्ट्र ध्वज दिखाया जाना चाहिए। ऐसा करने से वह बालक तो राष्ट्रवादी होगा ही,उसके साथ साथ पूरे देश का वातावरण राष्ट्रवादी हो जायेगा।

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श्री क्षीरसागर ने कहा कि जब ऐसे राष्ट्रवादी बालकों की पीढ़ी बड़ी होगी, तो देश में राष्ट्रवाद की फसल लहलहाने लगेगी। ऐसे बच्चे देश को तो मजबूत बनायेंगे ही, साथ-ही-साथ वे देश को कमजोर करने वाली तमाम कुरीतियों जैसे जातिवाद, भ्रष्टाचार, अन्याय, नफरत आदि को जड़ से उखाड़ फेकेंगे।
बालक के बड़े होने पर जब वह बालवाड़ी में जाये तो उसे वहां केवल राष्ट्रप्रेम, परिवार प्रेम, माता-पिता तथा गुरुओं का आदर करने की शिक्षा दी जानी चाहिए। उन्हें क्रांतिकारियों की जीवनी पढ़ाई जानी चाहिए। उसके बाद ही उन्हें औपचारिक शिक्षा में प्रवेश देना चाहिए।
जब बालक की औपचारिक शिक्षा शुरू हो; तो उसे अन्य विषयों के साथ-साथ सैनिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाना चाहिए; ताकि जरूरत पड़ने पर वह देश की सुरक्षा भी कर सके।

उन्होंने कहा कि इस तरह बच्चों को केंद्र मानकर जब राष्ट्रवादी अभियान शुरू होगा; तो एक नये युग का सूत्रपात होगा और भारत सही अर्थों में विश्व की महाशक्ति बन सकेगा।

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