Network Marketing Guidelines Hindi

डायरेक्ट सेलिंग गाइडलाइन क्या है Direct Selling Guideline Kya Hai

Spread the love

दोस्तों डायरेक्ट सेलिंग को नेटवर्क मार्केटिंग या मल्टी लेवल मार्केटिंग भी कहते हैं.

डायरेक्ट सेलिंग व्यवसाय को सही ढंग से चलाने के लिए भारत सरकार ने कुछ नियम बनाये हैं.

सभी डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों और उससे जुड़े लोगों को ये नियम मानने जरुरी हैं.

Read: Benefits of Direct Selling

इस गाइडलाइन को बनाने का उदेश्य इस कारोबार में गलत कार्यों को रोकना है ताकि उपभोक्ताओं के साथ कोई धोखाधड़ी न हो.

डायरेक्ट सेलिंग गाइडलाइन Direct Selling Guidelines India

इस गाइडलाइन को मानने वाली कम्पनी को ही ही लीगल कम्पनी माना जायेगा. अन्यथा वह कंपनी पोंजी स्कीम या पिरामिड स्कीम में गिनी जाएगी.

यह गाइडलाइन ९ सितमबर २०१६ को केन्द्रीय उपभोक्ता मंत्रालय ने जारी किया. इस गाइडलाइन की व्यवस्था निम्नवत है.

१. इस गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक डायरेक्ट सेलर को अग्रलिखित नियमों को मानना होगा.

Read: Success in Direct Selling (MLM)

व्यवस्था के अनुसार हर डायरेक्ट सेलर को सबसे पहले अपना परिचय देना होगा तथा अपनी कंपनी के बारे में जानकारी देनी होगी. बिना परिचय दिये आप प्रोडक्ट का प्रदर्शन नहीं कर सकते.

डायरेक्ट सेलर को अपने साथ पहचानपत्र भी रखना जरुरी है. उपभोक्ता की अनुमति के बिना आप उसके परिसर में नहीं जा सकते.

उपभोक्ता को गलत जानकारी देकर नेटवर्क में नहीं लाया जा सकता. उपभोक्ता से ऐसा वादा नहीं किया जा सकता जो शत प्रतिशत पूरा न हो सके.

प्रोडक्ट के सेल के समय डायरेक्ट सेलर को अपनी पूरी जानकारी, कंपनी की पूरी जानकारी, बिल तथा रिफंड आदि की पूरी जानकरी देनी होगी.

डायरेक्ट सेलर जब चाहे कम्पनी छोड सकता है. उसे कम्पनी की नीति के तहत रिफंड का पैसा प्राप्त करने का अधिकार होगा.

डायरेक्ट सेलर के पास खुद की पुस्तिका होनी. इसमें उसकी खरीद बिक्री की पूरी जानकरी होनी चाहिए.

डायरेक्ट सेलर कोई ऐसी जानकारी आगे ना बढ़ाये जो कंपनी ने जारी न किया हो. नए डायरेक्ट सेलर को ज्यादा सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है.

डायरेक्ट सेलर नए लोगों को बुलाते समय कोई जानकारी छिपा नहीं सकता है.

२. सरकार की गाइडलाइन के अनुसार हर डायरेक्ट सेलिंग कंपनी को अग्रलिखित नियमों का पालन करना होगा.

कंपनी का भारत सरकार के पास रजिस्टर्ड होना जरुरी है. कपनी को राज्य के उपभोक्ता विभाग को भी अपने बिजिनेस की जानकरी देनी होगी.

कंपनी ३ लोगों की एक समिति बनाये जो उपभोक्ता और सेलर के बीच समस्याओं का निवारण करे.

कंपनी के पास खुद की वेबसाईट होनी चाहिये जिसमें सारी जानकारी के साथ शिकायत आदि करने की भी सुविधा हो. कंपनी के पास राज्य में अपना कार्यालय हो जो कंपनी या उसके प्रबन्धक के नाम से हो.

कंपनी के प्रबंधक पर पिछले ५ साल के दौरान कोई आपराधिक मामला कोर्ट में नहीं होना चाहिए.

कंपनी अपने सेलर और डिस्ट्रीब्युटर पर नजर रखेगी कि वे गाइडलाइन के खिलाफ काम न करें.

कंपनी को ४५ दिन के भीतर आने वाली शिकायतों का निदान करना होगा.

यदि कोई सेलर २ साल से कोई बिक्री नहीं कर रहा है तो उसे नोटिस देकर डायरेक्ट सेलिंग के समझौते से अलग करना होगा.

कंपनी को डायरेक्ट सेलर की खरीद बिक्री का डाटा देना होगा. अगर सेलर vat के अंतर्गत आता है तो कम्पनी को उसे टैक्स भरने के लिए नोटिस देना होगा.

 डायरेक्ट सेलिंग कंपनी और पिरामिड स्कीम

डायरेक्ट सेलिंग कंपनी प्रोडक्ट/सर्विस आधारित होती है जबकि पिरामिड कम्पनी सिर्फ नए लोगों को लाने पर जोर देती है. डायरेक्ट सेलिंग कम्पनी अपने सेलर को प्रोडक्ट / सर्विस बेचती है जबकि पिरामिड कम्पनी नए सदस्यों से भारी रकम मांगती है.

गाइडलाइन का उल्लंघन

अगर डायरेक्ट सेलर गाइडलाइन का उल्लंघन करेगा तो उसके खिलाफ कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट १९८६ के तहत कार्रवाई होगी.

यदि कम्पनी गाइडलाइन के खिलाफ काम करेगी तो उसके प्रबंधक,अध्यक्ष व संस्थापक के खिलाफ मामला दर्ज होगा.

वहीं पिरामिड स्कीम में शामिल व उसका प्रमोशन करने वालों पर भी कार्रवाई हो सकती है.

प्रत्येक डायरेक्ट सेलर और इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को भारत सरकार की गाइडलाइन जरुर पढनी चाहिये ताकि वे सही ढंग से बिजनेस कर सकें.


Spread the love

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *