मुंबई: सुप्रसिद्ध समाजसेवी और महाराष्ट्र एनसीपी के वरिष्ठ नेता श्री पारसनाथ तिवारी ने कहा है कि कोरोना की बीमारी ने यह बात सिद्ध कर दी कि प्राचीन भारतीय जीवन पद्धति दुनिया की सर्वश्रेष्ट जीवन पद्धति है .
आज एक विशेष  बातचीत में श्री तिवारी ने कहा कि भारत में कुछ लोग भारतीय संस्कृति का मजाक उड़ाते थे .हमारे ग्रंथों को फाड़ने का एक चलन निकल पड़ा थl. प्राचीन भारतीय जीवन शैली को ख़ारिज किया जाता था लेकिन आज कोरोना ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय जीवन शैली दुनिया की सबसे अधिक वैज्ञानिक जीवन शैली थी .
उन्होंने कहाकि हजारों वर्षों की साधना के बाद हमारे ऋषियों और मुनियों ने सभी खतरा पहुंचाने वाली चीजों की जानकारी हासिल कर ली थी. उन्हें यह भी मालूम था कि क्या चीज हमारे लिए सबसे ज्यादा हानिरहित और फायदे मंद है .इन्हीं सब बातों को लेकर अनेक ग्रंथों की रचना  हुई और हमारे  ये प्राचीन ग्रन्थ इन सारी जानकारियों से भरे पड़े हैं .इन ग्रंथों ने हमें बताया है कि शाकाहार सबसे फायदेमंद और हानिरहित है . जो बात हमारे यहाँ हजारों साल पहले प्रचलित थी तथा कथित एडवांस लोग आज पूरी दुनिया को  उसी शाकाहार को अपनाने की सलाह दे रहे हैं .
उन्होने कहाकि जब हमारे शास्त्र बोलते थे कि आहार विहार का बहुत गहनता से ध्यान दो, अपने खाने को शुद्ध और सात्विक रखो तो नए ज्ञानी उसकी खिल्ली उड़ाते थे,किताबें जलाई जाती थीं, बकवास और पुराना बोलकर उनका उपहास किया गया .लेकिन चीन और अन्य देशों में आहार विहार पर ध्यान न देने के कारण पूरी दुनिया संकट में पड गयी है . बर्ड फ्लू और  कोरोना सिर्फ और सिर्फ मांस भक्षण और गलत आहार का परिणाम  हैं .
श्री तिवारी ने कहाकि चीन में आज ७० लाख से अधिक लोगों को शीशे में कैद कर रख दिया गया है .उनको कोई छू नहीं सकता .उनसे कोई बोल तक नहीं सकता .जिस तरह अपने भोजन के लिए उन्होंने जीव जंतुओं को यातनाएं दीं,आज वही यातना उनको मनुष्य होकर झेलनी पड रही है .आज विश्व में एक नारा चल गया है शाकाहारी बनो .चीन में सरकार की तरफ से आदेश आ गया है कि अधिकाधिक  सब्जियां  उगायें और उन्हीं का सेवन करें.
 उन्होंने कहाकि हमें गर्व होना चाहिए अपने शास्त्रों पर, अपने पूर्वजों की बातों पर जिन्होंने इतनी गूढ़ और सदा के लिए हितकारी बातें लिख दीं हैं,जो अकाट्य हैं .लेकिन हमें  उनको गरियाना आता है .ये पुस्तकें गरियाने और जलाने के लिए नहीं बल्कि पढ़ने के लिए, पढ़कर समझने के लिए और समझकर आत्मसात करने के लिए  बनाई गयी हैं .हमारी गीता और रामायण हमें आदर्श जीवन शैली प्रदान करते हैं .हमारा योग और हमारा  नमस्ते कितना वैज्ञानिक है, इसे आज पूरा विश्व महसूस कर  रहा है . इसी ज्ञान के कारण भारत विश्व गुरु था और एक दिन पूरी दुनिया को फिर हमारी जीवन शैली को अपनाना पड़ेगा . भारत अपने प्राचीन ज्ञान के बल पर  एक दिन फिर विश्वगुरु  बनेगा .

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here