मुंबई :सुप्रसिद्ध समाजसेवी और मुंबई के  पूर्व  उपमहापौर बाबूभाई भवानजी ने कहा है कि नागरिकता संशोधन कानून देश के हित  में है । आज यहाँ कुर्ला में सीएए के समर्थन में  आयोजित एक सभा में भवानजी ने कहाकि यह कानून नया नहीं है बल्कि नागरिकता कानून १९५५ को सुधारा गया है। इस संशोधन के तहत  १९१४ से पहले भारत आये पाक ,अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश के हिन्दुओं,सिखों ,बौद्धों तथा क्रिश्चियनों को भारत की नागरिकता दी जाएगी। ये मांग कांग्रेस नेता  मनमोहन सिंह ने भी की थी जिसका विडिओ उपलब्ध है।

उन्होने ने कहाकि यह सरासर झूठ है कि  यह कानून मुसलमानों के खिलाफ है। यह कानून नागरिकता  देने के लिए है  रद्द करने के लिए नहीं। देश के मुसलमानों से इसका कोई सम्बन्ध नहीं है। इसके तहत किसी को अपनी नागरिकता सिद्ध नहीं  करनी पड़ेगी। सीएए  और एनआरसी दो अलग अलग क़ानून  हैं। एनआरसी सिर्फ असम  में है जिसे राजीव गाँधी ने लाया था। असम  में एनआरसी पर काम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण  चल रहा है। सीएए से समानता के अधिकार  का भी उल्लंघन नहीं होता है।

उन्होंने कहाकि नार्थ ईस्ट में कुछ लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं लेकिन वे किसी खास धर्म का विरोध नहीं कर रहे हैं। वे किसी भी  देश से आये किसी भी धर्म के आदमी का विरोध कर रहे हैं। यह संशोधन असम ,मेघालय,त्रिपुरा,अरुणांचल प्रदेश,मिजोरम और नागालैंड में लागू नहीं होगा। नागरिकता  के लिए जो कानून पहले था वह आज भी है। किसी भी देश के मुस्लिम या  अन्य लोग आवेदन करके नागरिकता पा  सकते हैं।

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उन्होंने कहाकि पीएम मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में विभिन्न देशों के ५६६ मुस्लिमों को भारत की नागरिकता  दी है।

 

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