मुंबई : सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता  और  राजनैतिक विचारक प्रदीप परख का कहना है कि आम आदमी ,समाज और राजनीति  एक दूसरे  के विरोधी नहीं बल्कि एक दूसरे  के पूरक हैं।

आज यहाँ एक विशेष बातचीत के दौरान श्री परख ने वर्तमान राजनीति  और सामाजिक अंतर्विरोधों पर विस्तार से बातचीत की।  उन्होंने कहाकि आम आदमी भले ही अलग अलग विचारधारा से सम्बन्ध रखता है लेकिन वह नफ़रत की हद तक नहीं जाता है बल्कि वह दूसरे के विचारों की भी  इज्जत करता है। लेकिन राजनीति में काम करने वाले लोगों में इस प्रवृत्ति का अभाव दिखता है। कई मुद्दों पर वे अपनी पार्टी की विचारधारा से सहमत न होते हुए भी उसका समर्थन करते हैं और यह  स्वीकार करते हैं कि  मजबूरी में उन्हें यह काम करना पड़  रहा है।

श्री परख ने कहा है कि  राजनीतिज्ञों में  सहिष्णुता होनी चाहिए।  उन्हें दूसरे के अच्छे विचारों का भी समर्थन करना चाहिए, तब जाकर देश में एक स्वस्थ राजनीति  की शुरुआत  होगी। राजनीति  में पक्ष  विपक्ष का होना एक व्यवस्था है।  इसे  दुश्मनी के भाव से नहीं लेना चाहिए। पक्ष विपक्ष एक दूसरे के शत्रु नहीं बलि एक दूसरे के पूरक हैं। लोकतंत्र में यदि विपक्ष नहीं होगा तो लोकतंत्र का कोई मतलब नहीं होगा। इसलिए राजनीतिज्ञों  को विपक्ष के भी विचारों को आदर करना चाहिए। उन्होंने कहाकि समाज, राजनीति  और आम आदमी एक दूसरे के पूरक हैं। इसमें से यदि एक भी समूह ख़त्म हो जायेगा तो बाकी  दोनों अपने आप ख़त्म हो जायेंगे। इसलिए  हमें एक दूसरे को बचाने  और मजबूत करने का काम  करना चाहिये।

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