जल संकट को प्राथमिकता के आधार पर हल करे सरकार – क्षीरसागर

ठाणे। वरिष्ठ समाजसेवी और शेकाप के ठाणे जिला सचिव श्री नारायण क्षीरसागर ने कहा है कि पानी की समस्या पूरे देश में विकराल रूप लेती जा रही है । केंद्र व संबंधित राज्य सरकारों को चाहिए कि वे एक साल के बजट का अधिकांश पैसा जल प्रबंधन पर खर्च कर दें और सबसे पहले देश को पानी के संकट से उबारें ।

श्री क्षीरसागर ने आज एक साक्षात्कार में कहा कि सबसे पहले देश की सभी नदियों आपस मे जोड़ देना चाहिए ताकि उत्तर की नदियों के समुद्र में जाने वाले पानी को दक्षिण तक लाया जा सके ।गर्मी में हिमालय की बर्फ पिघलती है जिससे उत्तर की नदियों में गर्मियों में भी पानी रहता है ।यदि उत्तर दक्षिण की नदियां आपस में जुड़ जाएंगी तो दक्षिण की नदियों में भी गर्मियों भी पानी रहेगा । इससे दक्षिण में पानी की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है ।

उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर जल संरक्षण अभियान चलाया जाए और वह तालाबों ,कुंओं आदि की संख्या बढ़ाई जाए ।
श्री क्षीरसागर ने कहाकि मेरा मत है कि नदियों को बहते रहने देना चाहिए और उनके मार्ग में रुकावट नहीं डालना चाहिए । इसके बजाय जल भंडारण के दूसरे साधनों का विकास किया जाना चाहिए ।

उन्होंने कहाकि भूगर्भ जल को बढ़ाने का काम युद्ध स्तर पर किया जाना चाहिए ।
श्री क्षीरसागर ने आगे कहाकि बारिश के मौसम में आये दिन अनेक भागों में जल-भराव होता है और बाढ़के कारण आम जन-जीवन प्रभावित होता है।

उन्होंने बताया कि यदि हम रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिये बारिश का पानी जमीन में रिसाने की व्यवस्था करे तो भूजल भी बढ़ेगा और जलभराव की समस्या से छुटकारा मिल जायेगा।

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उन्होंने बताया कि शहरों में हर हाउसिंग सोसायटी में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य किया जाये। मैदानों और खुली जमीनों में बारिश के पानी को रिसाने का पर्याप्त इंतजाम किया जाना चाहिए।

नालों और ड्रेनेज को तल में पक्का नहीं किया जाना चाहिए ताकि मिट्टी के सहारे पानी जमीन में रिस सके। उन्होंने कहा कि शहरों में सारी जमीन पक्की कर दी गयी है जिससे पानी जमीन में रिस नहीं पाता। इससे भूगर्भ जल कम हो रहा है और जल भराव की समस्या पैदा हो रही है।

उन्होंने कहाकि बारिश का एक भी बूंद पानी समुद्र में नहीं जाने देना चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि नालों को और गहरा करके उसमें पत्थर डाल दिया जाए तथा मैदानों, गार्डेनों, कंपाउंडों तथा खुली जगहों पर गड्ढा करके उसमें पत्थर डाल दिया जाए तो नाममात्र के खर्च पर जल रिसाव की व्यवस्था हो सकती है।

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