महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन और शरद पवार

मुंबई :   महाराष्ट्र में अब तक तीन  बार राष्ट्रपति शासन लग चुका है और तीनों ही बार दिग्गज  मराठा  नेता  शरद पवार  इस राजनीतिक घटना के केंद्र में रहे . इसीलिये कहा जाता है कि राज्य की राजनीति में शरद पवार की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता है .

महाराष्ट्र राज्य १ मई १९६० को अस्तित्व में आया  था और यशवंत राव चव्हाण महाराष्ट्र के पहले मुख्यमंत्री बने थे . सन १९७८ में शरद पवार ने  बसंतदादा पाटिल की कांग्रेसी सरकार को  गिराकर  प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट का गठन किया और पहली बार राज्य में अपनी सरकार बनायी .  उस समय वे बसंतदादा पाटिल की सरकार में मंत्री  थे . सन १९८० जब इंदिरा गांधी केंद्र की सत्ता में वापस लौटीं तो उन्होंने १७ फरवरी १९८० को शरद पवार की सरकार को  बर्खास्त करके राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया .  तब  राज्य में पहली बार राष्ट्रपति शासन लगा था.यह राष्ट्रपति शासन  ८ जून १९८० तक चला.  इस दौरान  हुए चुनाव में कांग्रेस राज्य की सत्ता में वापस लौटी और अब्दुल रहमान अंतुले मुख्यमंत्री बने .

२८ सितम्बर  २०१४ को राज्य में दूसरी बार राष्ट्रपति शासन लगा  जब सत्ता में भागीदारी को लेकर शरद पवार की पार्टी एनसीपी ने तत्कालीन पृथ्वीराज चव्हाण सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था और चव्हाण ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया  . इस बार राष्ट्रपति शासन ३२ दिन तक चला था . २०१४ का विधानसभा चुनाव  राष्ट्रपति शासन के बीच हुआ था और उसके बाद देवेन्द्र फडनवीस राज्य के मुख्यमंत्री बने .

तीसरी बार राज्य में १२ नवम्बर २०१९ को राष्ट्रपति शासन लगा,जब कोई भी दल सरकार के गठन के लिए जरूरी विधायकों का समर्थन  नहीं जुटा सका . इस चुनाव में भाजपा ने  शिवसेना के साथ और कांग्रेस ने एनसीपी  के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था.  चुनाव में भाजपा शिवसेना गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिल गया था लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों दलों में खींचतान शुरू हो गयी . राज्यपाल ने भाजपा,शिवसेना और एनसीपी को सरकार के गठन के लिए बुलाया लेकिन सभी दल तय समय में जरुरी विधायकों का इंतजाम करने में विफल रहे .   भाजपा से टकराव के बाद शिवसेना सांसद  संजय राऊत  सरकार के गठन के लिए  शरद पवार के साथ लगातार मीटिंग करते रहे लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली और अंततः राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया .

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *