Bharat Ki Nayi Shiksha Niti

नई शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख बिंदु-Nai Shiksha Niti 2020 ke pramukh bindu hindi

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लंबे विचार विमर्श के बाद केंद्र सरकार ने बुधवार को नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी. करीब ३४ साल बाद भारत के शिक्षा क्षेत्र में इतना बड़ा बदलाव किया गया है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला किया गया.

इस नीति में २०३० तक प्राथमिक स्तर पर शत प्रतिशत प्रवेश का लक्ष्य रखा गया है.

शिक्षा पर होनेवाला खर्च ४. ४३ प्रतिशत से बढ़कर ६ प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है.

आइये जानते हैं कि नई शिक्षा नीति में मुख्य रूप से क्या क्या बदलाव किया गया है.

भारत सरकार की नई शिक्षा नीति २०२०

१. स्कूलों में १०+२ प्रणाली खत्म हो गयी है. इसकी जगह अब ५+३+३+४ प्रणाली अपनाने की बात कही गयी है.

अभी तक सरकारी स्कूल पहली कक्षा से शुरु होते हैं लेकिन नई शिक्षा नीति लागू होने पर बच्चों को पहले ५ साल फाऊँडेशन स्टेज से गुजरना होगा.

फाऊँडेशन स्टेज के आखिरी दो साल पहली और दूसरी कक्षा के होंगे.

पांच साल के फाऊँडेशन स्टेज के बाद बच्चा तीसरी कक्षा में जायेगा.

५+३+३+४ के नए सिस्टम में पहले ५ साल ३ से ८ साल तक बच्चों के लिए, उसके बाद के ३ साल ८ से ११ साल तक के बच्चों के लिए, उसके बाद के तीन साल ११से१४ साल तक के बच्चों के लिए और आखिरी ४ साल १४ से १८ साल तक के बच्चों के लिए होगा.

२. अब छठीं कक्षा से ही बच्चों को प्रोफेशनल स्किल की शिक्षा दी जाएगी.

व्यवसायिक शिक्षा और कौशल विकास पर जोर दिया जायेगा.

३. १० वीं और १२वीं की बोर्ड परीक्षा आसान होगी. दसवीं और १२वीं की बोर्ड परीक्षा में बड़े बदलाव किये जायेगे. परीक्षा साल में दो बार होगी.

इन्हें दो भागों में विभाजित किया जायेगा, वस्तुनिष्ठ और व्याख्यात्मक. रटने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित किया जायेगा. नई नीति में ३री,पाचवीं और आठवीं में भी परीक्षाएं होंगी. १० वीं और १२वीं की बोर्ड परीक्षा के स्वरुप बदले जायेंगे.

४. नई शिक्षा नीति में ५वीं तक मातृ भाषा में शिक्षा उपलब्ध कराई जायेगी. संभव हो तो ८वीं तक की शिक्षा मातृ भाषा में होगी.

५. बच्चों के रिपोर्ट कार्ड में बदलाव होगा. उनका तीन स्तर पर आकलन किया जायेगा. पहला आकलन छात्र स्वयं,दूसरा सहपाठी और तीसरा शिक्षक करेंगे.

पढाई छोड़ चुके बच्चों को फिर दाखिला दिलाया जायेगा.

६. ग्रेजुएशन में ३-४ साल की डिग्री होगी. मल्टिपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम होगा.

आज की व्यवस्था में अगर चार साल इंजीनियरिंग पढने या छः सेमेस्टर पढने के बाद किसी कारणवश छात्र आगे नहीं पढ़ पाते हैं तो कोई उपाय नहीं होता.

लेकिन मल्टिपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम में एक साल के बाद सर्टीफिकेट,दो साल के बाद डिप्लोमा और ३-४ के बाद डिग्री मिल जाएगी. यह छात्रों के हित में बड़ा फैसला है.

७. अब छात्रों को एम फिल नहीं करना होगा. एमफिल का कोर्स नई शिक्षा नीति में निरस्त कर दिया गया है. अब छात्र ग्रेजुएशन,पोस्ट ग्रेजुएशन और उसके बाद पीएचडी कर सकेंगे.

८. UGC,NCTE व AICTE को ख़त्म करके एक रेगुलेटरी बाडी बनाई जाएगी.

९. उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए एक कामन एट्रेंस एग्जाम की व्यवस्था होगी. यह अनिवार्य नहीं होगा.

यह परीक्षा रास्ट्रीय परीक्षा एजेंसी आयोजित करेगी.

१०. स्कूल में प्री प्रायमरी लेवल पर विशेष सिलेबस तैयार होगा. नई नीति में तकनीकी के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया गया है.

कक्षा ६ से ८ के बीच विषयों की पढाई होगी.

११. स्कूल कालेजों की फीस पर नियंत्रण के लिए तंत्र बनेगा. मौजूदा इन्स्पेक्टर राज ख़त्म होगा.

१२. सभी तरह के वैज्ञानिक व सामाजिक अनुसंधानों को नेशनल रिसर्च फाऊँडेशन बनाकर नियंत्रित किया जायेगा.

उच्च शिक्षण सस्थानों को बहु विषयक सस्थानों में बदला जायेगा.

१३. स्कूली शिक्षा के साथ तकनीकी तथा व्यावसायिक शिक्षा भी नई शिक्षा नीति के दायरे में होगी.

१४. कला, संगीत, योग आदि को पाठ्यक्रम में शामिल किया शामिल किया जायेगा. इन्हें सहायक पाठ्यक्रम नहीं कहा जायेगा.

१५. नई शिक्षा नीति में ऑनलाइन एजुकेशन पर ज्यादा जोर दिया जायेगा.

१६. हर जिल में कला और खेल सबंधी गतिविधियों में भाग लेने के लिए एक विशेष बोर्डिंग स्कूल बाल भवन स्थापित किया जायेगा.

१७. नई शिक्षा नीति में डीम्ड युनिवर्सिटी,सेन्ट्रल युनिवर्सिटी तथा स्टैंडअलोन इंस्टीट्युशंस के लिए एक समान नियम होगा.

१८. मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम अब शिक्षा मंत्रालय होगा.

१९. नई शिक्षा नीति में त्रिभाषा शिक्षा फार्मूला लागू होगा. सभी स्तरों पर संस्कृत को एक भाषा के रूप में चुनने का अवसर उपलब्ध होगा.

किसी भी विद्यार्थी पर कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी.अन्य भारतीय भाषाओँ और विदेशी भाषाओँ के विकल्प भी मौजूद होंगे.

२0. विदेशी युनिवर्सिटी को भी देश में कैम्पस खोलने की इजाजत दी जाएगी.

इससे छात्रों को बेस्ट इंस्टीट्यूट में प्रवेश मिलेगा और उन्हें विदेश नहीं जाना पड़ेगा.


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