प्रधानमंत्री धनलक्ष्मी योजना (Hindi) Pradhanmantri Dhanlaxmi Yojana

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धनलक्ष्मी योजना बीमा कवर वाली एक सशर्त नकद हस्तांतरण योजना है जो बालिकाओं के अस्तित्व को सुनिश्चित करने और उसके बेहतर भविष्य के लिए है. धनलक्ष्मी योजना भारत सरकार के महिला और बाल विकास संगठन द्वारा शुरू की गई है.

यह पूर्णतया केंद्र प्रायोजित योजना है. वर्ष २००८ में शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में लगातार गिरते लिंगानुपात को रोकना है. इस योजना के अंतर्गत बालिका के परिवार विशेषकर उसकी माता को कूछ शर्तें पूरी करने पर नकद राशि दी जाती है.

कुछ शर्तों के अंतर्गत जन्म का पंजीकरण, टीकाकरण, स्कूल में नामांकन एवं उसमें बने रहना को कराते समय ५००० रुपए, शिक्षा के लिए नामांकन कराते समय १००० रुपए, शिक्षा से संबंधित अन्य जरूरतों के लिए किस्तों में ६२५० रुपए दिए जाते हैं.

प्रधानमंत्री धनलक्ष्मी योजना

१. धनलक्ष्मी योजना के उद्देश्य:

योजना का मुख्य उद्देश्य परिवारों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना है ताकि बालिका को प्रोत्साहित किया जा सके, उसे शिक्षित किया जा सके, बाल विवाह को रोका जा सके और लड़कियों के लिए कुछ चिकित्सा खर्चों को कवर किया जा सके.

धनलक्ष्मी योजना योजना भारत में कन्या भ्रूण हत्या के मामलों को कम करने पर ध्यान केंद्रित करती है.

यह योजना बालिकाओं के लिए शिक्षा का मार्ग भी प्रशस्त करती है और शीघ्र विवाह को रोकने के लिए आकर्षक बीमा योजनाएं प्रदान करती है. इस योजना का उद्देश्य बालिकाओं के जीवन को महत्व देना था ताकिर उन्हें बोझ नहीं माना जाये. इस योजना माता-पिता के लिए नकद प्रोत्साहन की पेशकश की थी ताकि बालिकाओं को उज्वल भविष्य दिया जा सके.

हालांकि सरकार द्वारा शुरू की गई अधिक आकर्षक योजनाओं के परिणामस्वरूप यह योजना अब समाप्तप्राय हो गई है. लेकिन इसने बालिकाओं की तरफ सबका ध्यान खींचा.

यह योजना महिला और बाल विकास मंत्री रेणुका चौधरी द्वारा पेश की गई थी. कुछ ही समय में, इसे भारत के ११ पिछड़े राज्यों में ५००० से अधिक आवेदक मिले.

२. धनलक्ष्मी योजना के लिए पात्रता मानदंड:

८ नवंबर, २००८ के बाद जन्म लेने वाली सभी बालिकाएँ, इस योजना के लिए पात्र थीं. सभी बालिकाएँ, चाहे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कुछ भी हो, पात्र थीं. सभी बालिकाओं की संख्या के बावजूद, परिवार, पात्र थे. बालिका को भारतीय निवासी होना जरुरी था.

३. धनलक्ष्मी योजना के लाभ:

८ नवंबर २००८ के बाद जन्म लेने वाली सभी बालिकाओं को रु. ५००० का प्रारंभिक नकद प्रोत्साहन दिया गया. ६ सप्ताह से २४ माह के बीच की बालिकाओं के लिए, एक टीकाकरण नकद प्रोत्साहन कुल रु. २५०, दिया गया.

इसने इस लागत को कवर किया कि माता-पिता को भारत के पिछड़े राज्यों में अपने बच्चे को टीकाकरण करने के लिए वहन करना होगा. इस योजना में बालिकाओं की शिक्षा लागत को कवर किया गया. स्कूल में नामांकन से लेकर ग्रेड ८ तक. स्कूल में नामांकन के लिए, माता-पिता को १००० रुपये का नकद प्रोत्साहन दिया गया.

कक्षा ५ तक प्रत्येक वर्ष ५०० रुपये का नकद प्रोत्साहन माता-पिता को दिया जाता था. बालिकाओं की माध्यमिक स्कूली शिक्षा के लिए, माता-पिता को हर साल ७५० रुपये का नकद प्रोत्साहन दिया जाता था.

बाल विवाह को रोकने के लिए इस योजना के तहत माता-पिता को १८ लाख रुपये का बीमा कवर दिया जाता है जब लड़की १८ साल की हो जाती है. लड़की की उम्र के आधार पर नकद प्रोत्साहन सशर्त थे. जैसे यदि बालिका पहले से ही ग्रेड १ में है, तो वह अपनी शिक्षा के लिए नकद प्रोत्साहन प्राप्त करने के योग्य है, न कि टीकाकरण और जन्म पंजीकरण के लिए.

हालांकि यह योजना अब अस्तित्वहीन हो गई है. फिर भी इसने देश के पिछड़े राज्यों में महिला सशक्तीकरण पर ध्यान केंद्रित किया और जीवन के मूल्य पर प्रकाश डालते हुए बालिकाओं को केंद्र में रखा. दिलचस्प बात यह है कि ५००० से अधिक लड़कियां इस योजना में दी जाने वाली नकद प्रोत्साहन राशि की प्राप्तकर्ता थीं.


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