सरकार को व्यापारियों को मंदी से उबारने का काम करना चाहिए – भवानजी

मुंबई : सुप्रसिध्द समाजसेवी,भाजपा नेता और मुंबई के पूर्व उपमहापौर बाबूभाई भवानजी ने व्यापारी वर्ग का आवाहन किया है कि वे मंदी से उबरने के लिए अपने खर्चों में कटौती करे और साहस और धैर्य से काम ले ।
श्री भवानजी आज नेशनल वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा दादर में व्यापारियों के लिए आयोजित समुदेशन शिविर में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहाकि आज मंदी के कारण व्यापार घाटे में चल रहा है जिससे कई व्यापारी परेशान हैं और अनेक अप्रिय कदम उठा रहे हैं . उन्होंने कहा कि इस मंदी से उबरने के लिये व्यापारी वर्ग अपने खर्चों में कुछ समय के लिये कटौती करे . उन्होंने कहाकि सभी व्यापारियों को अपने धंधे के बारे में अपने परिवार में चर्चा करनी चाहिए और व्यापार में मंदी की बात सभी परिजनों को भी बता देना चाहिए। ऐसा करने सभी परिजनों को धंधे की सच्चाई मालूम हो जाएगी और वे यथा संभव उनका सहयोग करेंगे।
उन्होंने कहाकि व्यापारियों को खर्च कम करने के लिए नौकरों की संख्या में कटौती कर देनी चाहिये और घर के लोगों को धंधे में हाथ बटाना चाहिए। खर्च में कटौती के लिए निजी वाहनों का प्रयोग न करें और सार्वजानिक वाहनों का सहारा लें। ड्रायवरों की छुट्टी कर दें और जरुरत पड़ने पर खुद वाहन चलाएं। इसी तरह व्यापारियों को हर प्रकार के गैरजरूरी खर्चों में कटौती करके मंदी का सामना करना चाहिए। उन्होंने कहाकि व्यापारियों को हिम्मत से काम लेना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाना चाहिए।
उन्होंने कहाकि भगवान महावीर ने बताया था कि हमें अपनी आय का एक तिहाई परिवार पर और एक तिहाई व्यापार पर खर्च करना चाहिए। साथ ही साथ एक तिहाई पैसा बचत करना चाहिए ताकि मुश्किल के समय यह पूंजी काम आ सके ।
भवानजी जी ने इस अवसर पर केंद्र और प्रदेश सरकार को एक पत्र भेजकर कहा है कि खेती के बाद व्यापारी और उद्योजक ही सबसे ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करते है और देश को समृद्ध बनाते हैं । इस समय मंदी के कारण व्यापारियों और उद्योजकों का बुरा हाल है । ऐसे में सरकार को व्यापारियों को मंदी से उबारने का काम करना चाहिए ।इसके लिए लोन सस्ता करना चाहिए ,टैक्स कम कर देना चाहिए ,टैक्स प्रणाली को सरल और भ्रष्टाचार मुक्त बनाना चाहिए तथा बिजली, पानी की दर भी कम कर देनी चाहिए। जीएसटी को और सरल बनाया जाए और बिल का पैसा मिलने पर ही व्यापारियों से जीएसटी वसूली जाए ।बिना पैसा मिले ही जीएसटी भरने और मंदी से व्यापारियों की हालत खराब होती जा रही हैं और अनेक व्यापारियों के सामने आत्महत्या करने की स्थिति पैदा हो गयी है ।
उन्होंने बताया कि इसी प्रकार के समुदेशन शिविर मुंबई के विभिन्न भागों में आयोजित किये जायेंगे ताकि व्यापारियों को मंदी से उबरने का हौसला मिल सके।

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