Soil Health Card

सॉइल हेल्थ कार्ड कैसे बनायें? Soil Health Card Procedure (Hindi)

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सॉइल हेल्थ कार्ड मिट्टी के स्वास्थ्य का समय-समय पर मूल्यांकन करने वाला एक महत्वपूर्ण पैरामीटर है. यह मिट्टी पर वर्तमान कृषि प्रथाओं के प्रभाव को दर्शाता है और  मिट्टी की उर्वर स्थिति बनाए रखने का साधन देता है.

इसी इरादे के साथ भारत सरकार ने ५६८  करोड़ रुपये की सॉयल हेल्थ कार्ड (SHC) योजना शुरू की. २०१५  में शुरू की गई इस योजना के माध्यम से ३  साल की अवधि में १४  करोड़ किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया था.

SHC योजना मिट्टी आधारित परीक्षण और उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देती है जो किसानों को कम लागत पर अधिक पैदावार देने में सक्षम बनाता है. फरवरी २०१६  तक, १.१२  करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा चुके थे. अब मुद्रित कार्डों  की संख्या ९.५  करोड़ के करीब है.

मृदा स्वास्थ्य जटिल है और पारिस्थितिकी तंत्र के कार्यों की एक श्रृंखला पर निर्भर करती है. मिट्टी सिर्फ बेजान माध्यम नहीं है. बल्कि यह देखा गया है कि उपजाऊ मिट्टी भी जैविक रूप से बहुत सक्रिय होती है. पोषक तत्व जैसे एनपीके (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम) का स्तर आदि भी प्रमुख भूमिका निभाते हैं.

उर्वरकों के अनुचित उपयोग से मृदा स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. दुर्भाग्यवश अधिकांश किसानों को अभी भी मृदा की स्थिति का अनुमान लगाने के लिए अपनी स्वयं की वृत्ति पर निर्भर रहना पड़ता है.

उर्वरकों का उपयोग, सिंचाई और फसल चक्र ज्यादातर पिछली प्रथाओं या श्रवण पर आधारित होते हैं. किसान को सशक्त बनाने के उद्देश्य से SHC योजना शुरू की गई थी.

इस योजना के तहत मिट्टी के नमूने के परीक्षण और सुझाव दिए जाते हैं. ३  साल में हर बार संबंधित व्यक्ति के खेतों में पोषक तत्वों और उर्वरकों की फसल-वार सिफारिशें की जाएँगी.

इन सिफारिशों का उद्देश्य इनपुट्स के विवेकपूर्ण उपयोग से उत्पादकता में सुधार करना होगा.

यह सिफारिशें देने के लिए मिट्टी के नमूने एकत्र किए जाते हैं और देश भर के विभिन्न मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं में परीक्षण किए जाते हैं.

परीक्षण के बाद, विभिन्न विशेषज्ञ मिट्टी की ताकत और कमजोरियों (सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी) का विश्लेषण करते हैं और इससे निपटने के उपाय सुझाते हैं.

परिणाम और सुझाव कार्डों में प्रदर्शित किए जाएंगे. इस प्रकार, सॉइल हेल्थ कार्ड वाले किसान मिट्टी का पोषण करते हैं. इससे कम लागत से अधिक उत्पादन मिलता है.

सॉइल हेल्थ कार्ड कैसे बनायें?

सॉइल हेल्थ कार्ड आसानी  से बनाया जा सकता है. इसके लिए आपको अपने खेत की मिटटी के नमूने को नजदीकी सॉइल हेल्थ प्रयोगशाला में ले जाना है. वहां पर मिट्टी की जांच करके उसकी गुणवता के बारे एक रिपोर्ट कार्ड आप को दे दिया जायेगा.

आप इस काम में नजदीकी कृषि अधिकारी या सरपंच से भी मदद ले सकते हैं. इस योजना के बारे में अधिक जानकरी के लिए आप इसकी आफिसियल वेबसाईट soilhealth.dac.gov.in पर भी विजिट कर सकते हैं.


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